Thursday, April 5, 2018

'गौरैया' को घास के बीज है काफी पसंद ..धान भी खाती है चाव से


संजय कुमार यों तो घरेलू गौरैया को घास के बीज काफी पसंद होते हैं जो शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाते हैं.लेकिन यह चावल के छोटे छोटे दाने यानी खुददी बड़े ही चाव से खाते हैं. वैसे चिडियों का आहार में फल-फूल,बीज,अनाज,कीड़े -मकोड़ें, मांस और अन्य आहार शामिल हैं। देखा जाये तो चिड़ियों के दाँत नहीं होते ऐसे में वे आहार को निगल जाते हैं.
विशेषज्ञों की माने तो सबका अपना-अपना आहार होता है. जहाँ तक घरेलू गौरैया के आहार का सवाल है तो घास के बीज को ये काफी पसंद करते हैं. इसकी पुष्टि अंतरजाल करता हैं. लेकिन घरेलू गौरैया इंसानों के घरों में बसेरा रखने से इंसानों के यहाँ रखे अनाज को अपना आहार बनते हैं. जब घर की महिला अनाज को सूप के जरिये फटकती हैं जब अनाज जमीन पर गिरता है तो अनाज को खाने के लिए गौरैया फुदकती हुई झुण्ड में आती है और दाना चुगती है. समय-समय पर घरेलू गौरैया, इंसानों के घर में प्रवेश कर कीड़ें-मकोड़ें को भी खाती है.
पिछले 11 साल से गौरैया को मैं चावल के टुकड़े(खुददी) देता आ रहा हूँ ..साथ ही पिछले साल से धान भी देना शुरू किया...बड़े ही चाव से गौरैया धान को छिल कर खाती है.यही नहीं अपने बच्चे को भी धान छिल कर खिलाती है.गाँव में गौरैया को खुददी और धान खाने को आसानी से मिल जाता है. जब गाँव के लोग धान की बाली को गठरी बना कर घर की छत या खलियान में रखते हैं तो गौरैया आनंद लेकर खाती है. साथ ही कटनी के दौरान भी सहज इसे आहार मिल जाता है. लेकिन गाँव से गौरैया के विलुप्त होने की बात ने विशेषज्ञों को चौंकाया है. इसके पीछे फसल पैदावार में कीटनाशक के इस्तेमाल को दोषी माना जा रहा है. अपने बच्चे को शुरू में गौरैया कीड़े खिलाती है. विशेषज्ञों की माने तो कीटनाशकों के भारी प्रयोग से सब्जियों से कीड़े गायब हो रहे हैं.इससे गौरैया के बच्चे को पर्याप्त आहार नहीं मिल रहा है.
मैंने, गौरैया के खाने में मैंने चना और मूंगफली भी दिया, जिसे वे बड़े ही चाव से खाते दिखे.....वैसे धान को छिल कर खाने का अंदाज उनका निराला होता है.

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