संजय कुमार / विश्व से विलुप्ति के कागार पर खड़ी गौरैया को जहाँ बचाने की मुहिम जारी है वहीं गौरैया भी इस मुहिम में शामिल है। अमूमन 14 से 16 से.मी. लम्बी आकार वाली गौरैया के बच्चे इस मौसम में उडान भरने लगे हैं।
घोसला से निकल बच्चा गौरैया अपने मां-पापा के साथ खुले आसमान में मार्च के प्रथम सप्ताह से उडान भर रहा है आगे पीछे उसकी सुरक्षा में नर एवं मादा गौरैया रहती है। इस उड़ान में बच्चा गौरैया जब जमीन, पेड़ या मकान पर बैठता है तो नर या मादा गौरैया उसके लिए दाना चुग कर लाती है, जैसे ही दाना लेकर आती है बच्चा गौरैया पंख को फड़फडाते हुए खाना के लिए मुंह खोलता है। नर या मादा गौरैया अपने बच्चे के मुंह में खाना डाल देती है वैसे जहाँ नर या मादा गौरैया दाना चुगती है वहीं बच्चा भी दाना चुगता है। लेकिन बच्चे को गौरैया जोड़ा दाना खिलाते है। इस दौरान बच्चा गौरैया चीं चीं की आवाज निकाल कर पंख को फड़फडाते हुए खाना मांगता है।
हालांकि पूरी कोशिश होती है कि बच्चा खुद से खाना खाये।
पूरा दृश्य मनमोहक होता है।
बच्चा गौरैया को शुरू में यह आंकलन करना मुश्किल होता है कि वह नर है या मादा। लेकिन जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है उसकी पहचान सामने आती ही जाती है।
नर गौरैया का सिर, गाल तथा अंदर का भाग धूसर होता है तथा गला, सीने के ऊपर, चोंच एवं आंखों के बीच का भाग काला होता है।
मादा के सिर या गले पर काला रंग नहीं होता और सिर के ऊपर भूरे रंग की धारी होती है। वैसे मादा गौरैया, नर से आकार में छोटी होती है।
*(खुद के आकलन के अनुसार)


No comments:
Post a Comment