संजय कुमार
छोटी सी नन्ही सी प्यारी "गौरैया" ज्यादा तापमान सहन नहीं कर सकती है। गर्मी आते ही पानी की तलाश में यह भटकने लगती है। जैसे- जैसे गर्मी बढती जाती है प्यास की तलब बढती ही जाती है। इसका जीवंत प्रमाण है इसके चोंच का खुलना और पानी नहीं मिलने पर हाफना । यह गरमी की तपीस को खत्म करने के लिए यह कई बार पानी पीने आती है प्यास बुझने के पहले और बाद में उसका चेहरा देखने से साफ़ पता चल जाता है।
पानी के बर्तन में पानी नहीं रहने से यह इंसान के घर के अंदर आकर रसोईघर या आंगन में लगे नल के पास पानी पीने आती है ।
नल की टोंटी में मुंह लगा कर पानी की बूंद से प्यास बुझाती है । गन्दा पानी यह नहीं पीती है । अगर आपने अपने घर आँगन या बालकोनी या फिर खुले में गौरैया जैसी पक्षियों के लिए पानी नहीं रखा है तो आज ही पानी का बर्तन रखिये । इंसान तो पानी मांग कर प्यास बुझा लेता है । लेकिन जब चिड़िया पानी मांगती है तो उसकी बोली हम समझ नहीं पाते,जबकि चिड़िया भी आवाज देकर पानी मांगती है ।
मैंने कई बार देखा है । पानी खत्म होने या फिर बर्तन में कौआ द्वारा गन्दा डाल देने पर गौरैया खूब शोर मचाती है । आपको विश्वास नहीं होगा । पानी के लिए यह कभी कभी घर में प्रवेश कर आवाज लगती है ।
पंखा चलने से वह डरती है फिर भी किचेन में आकर आवाज देती है । पानी डालने के बाद ही शांत होती है ।
कुछ लोग सोचते हैं कि केवल गर्मी में चिडियों को पानी चाहिए होता है ।
ऐसा नहीं है सर्दी में भी चिडियों को इंसान की तरह पानी चाहिए होता है । गर्मी में पानी की मात्र बढ़ जाति है । सर्दियों में गौरैया को नियमित पानी पीते देखा । रोज पानी के बर्तन में पानी बदलना चाहिए ।
आइये विलुप्त होती गौरैया को बचाये । ज्यादा तापमान यह सहन नहीं कर पाती है । आपके छोटे से प्रयास से विलुप्त होती गौरैया को जीवन मिलेगा ।
No comments:
Post a Comment