Monday, June 4, 2018

*गौरैया पत्रिका* बंद

संजय कुमार 

बिहार सरकार ने 2013 में 'गौरैया' को राजकीय पक्षी घोषित किया था और 2014 में इसके संरक्षण को लेकर एक पत्रिका *गौरैया*का प्रकाशन शुरू किया। इसमें  पर्यावरण को समेटे विभिन्न विषय को जगह दी जाति रही । 4 जून 18 के दैनिक  भास्कर में प्रणय प्रियंवद की प्रकाशित रिपोर्ट से मालूम हुआ कि यह पत्रिका बंद हो गयी। 
दुःखद है, पर्यावरण पर सरकारी पत्रिका का बंद होना। दुख इस बात का है कि नाम तो 'गौरैया' था लेकिन विलुप्त होती इस छोटी चिड़िया को जगह कम ही दी गयी ।
20 मार्च विश्व गौरैया दिवस पर, गौरैया पर मैटर के लिए एक शोधकर्ता मेरे पास आये थे। उनके पास गौरैया पत्रिका के कई अंक थे। उन्होंने बताया कि जब मैं पत्रिका के लिए गया तो मुझे कहा गया कि गोदाम से जाकर ले लीजिए ....धूल फांकती पत्रिका को निकाला लेकिन गौरिया पर  सामग्री  नहीं मिलने से उदास थे,हालाँकि नेट पर बहुत मैटर है लेकिन वे सरकारी पहल और बिहार से जुडी सामग्री खोज रहे थे  ।..मेरे पास जितनी जानकारी थी मैंने उन्हें दिया । 
*गौरैया पत्रिका*बंद के कारणों पर मंत्री, प्रधान सचिव व संपादक का बयान भी भाई प्रणय ने रिपोर्ट में दिया है। सबके अपने अपने तर्क थे  । मुझे लगता है कि पत्रिका के सम्पादक ने भी खास रूचि नहीं ली । सभवतः गौरैया संरक्षण को देखते हुए हर अंक में इस पर आलेख होना चाहिए था ,जो नहीं दिखा। बिहार और देश में गौरैया संरक्षण पर काम हो रहा है उसे भी दिया जा सकता था। पत्रिका को प्रोफेशनल लुक नहीं दिया गया। जो जरूरी था। क्या क्या छपा और कौन कौन छपे इस पर भी बात होनी चाहिए। लेकिन एक सवाल तो उठता ही है कि गौरैया पत्रिका ने खुद 'गौरैया' को नजरअंदाज क्यों किया ?

Sunday, May 13, 2018

आइये रूठी 'गौरैया' को बुलाने की करें पहल

बिहार के औरंगाबाद से प्रकाशित दैनिक अख़बार "नवबिहार टाइम्स" के 12 मई 2018 के अंक में  मेरा आलेख आइये रूठी 'गौरैया' को बुलाने की करें पहल 


Thursday, May 10, 2018

बढ़ रही है गरमी, ‘गौरैया’ के लिए रखिये पानी

नन्ही सी प्यारी गौरैया’ ज्यादा तापमान सहन नहीं कर सकती
दूसरी भी चिड़िया भी आती है पानी पीने
संजय कुमार / छोटी सी नन्ही सी प्यारी गौरैया’   ज्यादा तापमान सहन नहीं कर सकती है। गर्मी बढ़ रही है यह पानी की तलाश में यह भटकने लगी है। जैसे-जैसेगर्मी बढ़ती जा रही है प्यास की तलब इसकी बढती ही जा रही है।
गरमी बढ़ते ही गौरैया’ चोंच का खुलना और पानी नहीं मिलने पर हाफते हुए देखा जा सकता है। यह गरमी की तपीस को खत्म करने के लिए यह कईबार पानी पीने आती है प्यास बुझने के पहले और बाद में उसका चेहरा देखने से साफ पता चल जाता है।
पानी नहीं मिलने से यह इंसान के घर के अंदर आकर रसोईघर या आंगन में लगे नल के पास पानी पीने आती है। नल की टोंटी में मुंह लगा कर पानीकी बूंद से प्यास बुझाती है। गौरैया’ गन्दा पानी नहीं पीती है।
गौरैया’ के लिए रखिये पानी
अगर आपने अपने घर आँगन या बालकोनी या फिर खुले में गौरैया जैसी पक्षियों के लिए पानी नहीं रखा है तो आज ही पानी का बर्तन रखिये। इंसानतो पानी मांग कर प्यास बुझा लेता है। लेकिन जब गौरैया’ पानी  मांगती है तो उसकी बोली हम समझ नहीं पाते। ग्यारह साल से गौरैया’  संरक्षण केदौरान मैंने कई बार देखा है। पानी खत्म होने या फिर बर्तन में कौआ द्वारा गन्दा डाल देने पर गौरैया खूब शोर मचाती है। आपको विश्वास नहीं होगा।पानी के लिए यह कभी कभी घर में प्रवेश कर आवाज लगती। पानी डालने के बाद ही शांत होती है। देखा जाये तो हम रोजाना कई लीटर पानी नहाने,मुंह-हाथ धोनेवाहन साफ करने में खर्च कर देते हैं।
दूसरी भी चिड़िया भी पानी के लिए आती हैं
गौरैया और अन्य चिड़ियों के लिए बस थोड़ा ही पानी चाहिये। मेरे बालकोनी में सालों से रखे पानी के बर्तन में पानी पीने के लिए गौरैया के अलावेतोतामैनाकबूतरबुलबुलपंडुकनाइटेंगिल आदि आते है।
इसलिए गौरैया सहित अन्य चिड़ियों के लिए बर्तन में पानी रखिये और रोज पानी बदलना भी चाहिये। पानी के बर्तन में जब कौआ गांदा डाल देंतोतुरंत साफ कर दें। कुछ लोग सोचते हैं कि केवल गर्मी में चिडियों को पानी चाहिए होता है। ऐसा नहीं है सर्दी में भी चिडियों को इंसान की तरह पानीचाहिए होता है।


 गर्मी में पानी की मात्र बढ़ जाती है। सर्दियों में भी गौरैया सहित अन्य को को नियमित पानी पीते देखा।
तो आइये छोटे  से  प्रयास से विलुप्त होती गौरैया को पानी पिलाये और उसके संरक्षण के मुहिम से जुडे़।
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